anūpama mādhurī jor̤ī
Unknown Author
अनूपम माधुरी जोड़ी
हमारे श्यामश्यामा की
रसीली रसभरी अंखियाँ
हमारे श्यामश्यामा की १
अनूपम माधुरी जोड़ी
हमारे श्याम-श्यामा की
रसीली रसभरी अंखियाँ
हमारे श्याम-श्यामा की १
छवीली है अदा बाँकी सुघर
सूरत मधुर बतियाँ
लटक गर्दन की मन बसिया
हमारे श्यामश्यामा की २
मुकुट और चन्द्रिका माथे
अधर पर पान की लाली
अहो कैसी भली छवि है
हमारे श्यामश्यामा की ३
छवीली है अदा बाँकी सुघर
सूरत मधुर बतियाँ
लटक गर्दन की मन बसिया
हमारे श्याम-श्यामा की २
मुकुट और चन्द्रिका माथे
अधर पर पान की लाली
अहो कैसी भली छवि है
हमारे श्याम-श्यामा की ३
परस्पर मिल के जब बिहरें
श्री वृन्दावन की कुञ्जन में
नहीं बरनत बने शोभा
हमारे श्यामश्यामा की ४
परस्पर मिल के जब बिहरें
श्री वृन्दावन की कुञ्जन में
नहीं बरनत बने शोभा
हमारे श्याम-श्यामा की ४
नहीं कुछ लालसा धन की
नहीं निर्वाण की इच्छा
सखी श्यामा को दे दर्शन
दया हो श्यामश्यामा की ५
नहीं कुछ लालसा धन की
नहीं निर्वाण की इच्छा
सखी श्यामा को दे दर्शन
दया हो श्याम-श्यामा की ५