anūpama mādhurī jor̤ī

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B7

अनूपम माधुरी जोड़ी

हमारे श्यामश्यामा की

रसीली रसभरी अंखियाँ

हमारे श्यामश्यामा की १

अनूपम माधुरी जोड़ी

हमारे श्याम-श्यामा की

रसीली रसभरी अंखियाँ

हमारे श्याम-श्यामा की १

छवीली है अदा बाँकी सुघर

सूरत मधुर बतियाँ

लटक गर्दन की मन बसिया

हमारे श्यामश्यामा की २

मुकुट और चन्द्रिका माथे

अधर पर पान की लाली

अहो कैसी भली छवि है

हमारे श्यामश्यामा की ३

छवीली है अदा बाँकी सुघर

सूरत मधुर बतियाँ

लटक गर्दन की मन बसिया

हमारे श्याम-श्यामा की २

मुकुट और चन्द्रिका माथे

अधर पर पान की लाली

अहो कैसी भली छवि है

हमारे श्याम-श्यामा की ३

परस्पर मिल के जब बिहरें

श्री वृन्दावन की कुञ्जन में

नहीं बरनत बने शोभा

हमारे श्यामश्यामा की ४

परस्पर मिल के जब बिहरें

श्री वृन्दावन की कुञ्जन में

नहीं बरनत बने शोभा

हमारे श्याम-श्यामा की ४

नहीं कुछ लालसा धन की

नहीं निर्वाण की इच्छा

सखी श्यामा को दे दर्शन

दया हो श्यामश्यामा की ५

नहीं कुछ लालसा धन की

नहीं निर्वाण की इच्छा

सखी श्यामा को दे दर्शन

दया हो श्याम-श्यामा की ५

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